कालूखेड़ा.संत रविदास का जीवन आध्यात्म सद्भभावना व समरसता का संदेश है। यही सशक्त राष्ट्र की कल्पना है,व्यक्ति जन्म से नही कर्म से महान बनता है। यह संत रविदास का जीवन कहता है। उनके प्रत्येक दोहे मे धर्म के प्रति आस्था एवं मनुष्यों मे मानवता का संदेश है। महान बनने के लिए धन सम्पदा नही ज्ञान संपदा की आवश्यकता है। संत रविदास का जन्म एक निर्धन परिवार मे हुआ लेकिन उन्होंने साधु संतो मे रह कर उच्च ज्ञान प्राप्त किया तो वे महान बन गये।
उनके जीवन की एक कहावत मन चंगा तो कसोटी मे गंगा ने मानव समाज को मानवता का पाठ पढ़ाया है चाहे वह ईश्वर ही क्यो न हो वह सदा हमारे हृदय मे है।
हमारा मन पवित्र है तो सब कुछ हमारे पास है। मानवता मनुष्य का मुल धर्म है बस इसे समझना है ,ईश्वर ने जात नही मानव बना कर भेजा है मानवता हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है इसे संजोए रखने वाला भी महान बन सकता है । जीवन मे संत रविदास जैसे संत मिल जाये तो हर इंसान महान बन सकता है। मीरा ने संत रैदास को गुरु माना तो आज मीरा की गाथाएं गाई जा रही है उक्त बात गांव रानीगांव मे विगत दिनों स्थापित संत रविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण के उपरांत सामाजिक कार्यकर्ता नारायणसिंह चिकलाना ने उपस्थित अनुयायी को संबोधित करते हुए कही। ज्ञात है कि सर्वहित संत शिरोमणि रविदास समिति द्वारा गांव में संत श्री की प्रतिमा स्थापित की गई थी जिसमें धर्म जागरण के दिनेश गुप्ता,समरसता के अर्जुनसिंह,पाटन संघ के मोहन राणा एवं गायत्री परिवार के दिनेश शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।माल्यार्पण के समय मोके पर मांगीलाल सुर्यवंशी, अंबाराम सुर्यवंशी, घनश्याम दडींग,कारुलाल दडिंग, दिनेश लोहार,सुरज सहीत सर्वहित संत शिरोमणि रविदास समिति के सदस्य उपस्थित थे । प्रारंभ में नारायणसिंह चिकलाना द्वारा रविदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया एवं उपस्थित सभी समाज जनों ने भी पुष्प अर्पीत किए।