कालूखेड़ा. सभ्य समाज वही जो समय के साथ चले। दहेज टीका शराब मांस मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुप्रथाओं के नाम पर अनावश्यक खर्च बंद होना चाहिए यही परीवार की बर्बादी का कारण है। विशेष कर विवाह समारोह मे मांस मदिरा बंद होना चाहिए। किसी भी प्रकार का नशा परीवार के लिए जिंदा जहर हैं। इनसे जीतना हो सके उतना बचे। बडी विडम्बना है कि बेटी बेटे को दहेज व टीका के नाम पर खरीदा बेचा जा रहा है। बेटी ही दहेज है इसे स्वीकार करे।बेटी व बेटा खरीदने बेचने की वस्तु नहीं परीवार की धरोहर है समय के साथ सोच बदलते हुए आर्थिक और मानसिक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है। सामुहिक आयोजन से समाज भाईचारा बनता है लेकिन आयोजन के नाम पर आडम्बर व दिखावे की होड चल रही है जीते जी माता-पिता की सेवा कर लेना सबसे बड़ा भोज है । अपनी सामर्थ से अधिक खर्च आर्थिक विकास मे बाधा है। उक्त बात गांव रिच्छाचांदा में एक सामाजिक समारोह में सामाजिक कार्यकर्ता नारायणसिंह चिकलाना ने उपस्थित समाज बंधुओ को संबोधित करते हुए कही। गांव के दशरथसिंह,पप्पूसिंह, सुरेन्द्रसिंह,विक्रमसिंह,तुफानसिंह,धुलसिंह,मांगुसिंह ,चंद्रपालसिंह, लोकेन्द्रसिंह सोलंकी व विशालसिंह कलालीया,धीरजसिंह धराड कमलसिंह ईसामपुर,राघवसिंह डोडीयाना,पुष्पेन्द्रसिंह चंद्रावत सहित अनेक रिश्तेदार व समाज बंधु उपस्थित थे।
